संभाग के दो जिलों में वन्य जीवों को लेकर संरक्षण एवं सतर्कता के साथ कार्य तेंदुआ का किया अंतिम संस्कार,मोर की आंखों से हटाई झिल्ली -डाग स्क्वाड पहुंचा स्थल पर वन विभाग ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की

उज्जैन। संभाग के उज्जैन एवं मंदसौर जिला अंतर्गत वन्य जीवों को लेकर संरक्षण एवं सतर्कता के साथ कार्य के मामले सामने आए हैं। मंदसौर जिला अंतर्गत नीमच-झालावाड मुख्य मार्ग पर तेंदुआ की मौत का मामला सामने आया है। उज्जैन में राष्ट्रीय पक्षी मोर को आंखों पर फैली झिल्ली हटाते हुए अंधत्व से मुक्ति दी गई है।तेंदुए का एनटीसीए गाइडलाइन से अंतिम संस्कार -मंदसौर वनमंडलाधिकारी संजय रायखेरे के अनुसार 7 मई 2026 को एक वन्यजीव तेन्दुआ की मृत्यु की घटना, “मुख्य सडक नीमच झालावाड” वन भूमि कक्ष क्रमांक 1011 बीट चंबल नं 3 वनपरिक्षेत्र गेम रेंज पूर्व गांधीसागर अभयारण्य के अंतर्गत सामने आई थी। इस पर एनटीसीए नई दिल्ली एवं कार्यालय मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्यप्रदेश, भोपाल से जारी दिशा-निर्देश अनुरूप त्वरित कार्यवाही करते हुऐ घटना स्थल को सुरक्षित किया गया ।  डॉग स्क्वाड की सहायता से घटना स्थल एवं उसके आस-पास छानबीन की कार्यवाही की गई। पोस्ट मार्टम विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों विशेषज्ञों डॉ. आकाश वाल्मीक एवं डॉ. सुमित कुमार पटेल के द्वारा किया गया। वन्यजीव तेन्दुआ शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाये गये। निर्धारित प्रक्रिया अनुसार शवदाह / भस्मीकरण की कार्यवाही म.प्र. शासन वन विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल के आदेशानुसार द्वारा गठित समिति सदस्य वृत्त उज्जैन मुख्य वनसंरक्षक उज्जैन आलोक पाठक, मंदसौर वनमंडलाधिकारी संजय रायखेरे, अधीक्षक गांधीसागर अमित राठौर, नायब तहसीलदार भानपुरा सुनील अग्रवाल, रेंज अधिकारी पूर्व गांधीसागर पी.एल. रायकवार, गेम रेंज अधिकारी पश्चिम गांधीसागर अभयारण्य पराग सेनानी, सरपंच ग्राम पंचायत गांधीसागर मनीष परिहार की उपस्थिति में दाह संस्कार किया गया। उपरोक्त समस्त कार्यवाही की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी की गई है। प्रकरण में वन अपराध प्रकरण क्रं. 3850/24 7 मई 2026 दर्ज कर प्रकरण में विवेचना कार्य जारी है।मोर की आंखों से झिल्ली हटाई –उज्जैन में शनिवार को एमआईटी कालेज परिसर से गार्ड धर्मेन्द्र चौहान की सूचना पर दल ने राष्ट्रीय पक्षी मोर का रेस्क्यू किया गया । प्रारंभिक स्थिति में ही सामने आया कि मादा मोर को देखने में समस्या हो रही है। उसे दाना चुगने में ही परेशानी हो रही थी। इस पर रेस्क्यू दल मोर को लेकर पशु चिकित्सक डा.अरविंद मैथनिया के पास पहुंचे थे। जांच के दौरान सामने आया कि मादा मोर की आंखों पर इंफेक्शन होने के कारण उसे देखने में परेशानी हो रही थी। तकरीबन उसकी पुरी आंख ही झिल्लीनुमा परत से ढक चुकी थी। डा.मैथनिया के अनुसार मादा मोर की आंखों को रूई के फोहे को सामान्य सलाईन से साफ किया गया। इससे आंखों पर चढी झिल्लीनुमा परत नरम हो गई जिसे हटा दिया गया। इससे मादा मोर को दिखाई देने लगा है। इसके साथ ही उसे आंखों में ड्राप डाला गया। मादा मोर को अभी वन विभाग के जिला रेस्क्यू कार्यालय में रखा गया है। पूर्ण स्वस्थता के उपरांत उसे वापस उसके रहवास में छोडा जाएगा। रेस्क्यू दल में सोनू चौहान, राजेन्द्र चौहान व देवकुमार शामिल थे।

Share:

संबंधित समाचार

Leave a Comment